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डीडी भारती के सर्वे में भाजपा के जय आहूजा का पलड़ा भारी 

अलवर जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट

अलवर (अनूप चौधरी)) राजस्थान के अलवर जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। यहाँ मुख्य मुकाबला भाजपा  के जय आहूजा और कांग्रेस के जुबेर ख़ान के बीच है। हालाँकि आज़ाद समाज पार्टी  के सुखवंत सिंह को भी टक्क्र में माना जा रहा था, परन्तु चुनाव प्रचार समाप्त होने तक वे तीसरे नंबर पर खिसक गए हैं। 
डी दी भारती के सर्वे में जहां भाजपा के जय आहूजा  को 46% और कांग्रेस के जुबेर ख़ान  को 38% वोट मिकल रहे हैं वहीँ यहाँ से भाग्य आजमा रही आजाद समाज पार्टी के सुखवंत सिंह  को 11% वोट मिलने की सम्भावना नज़र आ रही है।  अन्य के खाते में सिर्फ 5% वोट जाने की सम्भावना है। डी डी भारती के सर्वे में भाजपा के जय आहूजा इस बार अपने चाचा ज्ञान आहूजा की जगह विधायक की शपथ ले सकते हैं। 
डीडी भारती ने एक माह तक क्षेत्र का सघन सर्वे किया। इस क्षेत्र में इस बार मुकाबला कांटेदार होने की संभावना है।  यहां पर माली, ओड राजपूत, मेव, जाट, गुर्जर, ब्राह्मण और वैश्य वोटर्स की संख्या अधिक है।  यहां मुस्लिम वोटर्स भी अहम भूमिका में रहते हैं।  मुस्लिम वोटर्स में मेव मुस्लिम की संख्या सबसे अधिक है।  फिर एससी वोटर्स की भी अच्छी संख्या है। कांग्रेस से विधायक रही साफिया जुबेर का टिकट काट कर इस बार जहां उनके पति जुबेर खान को मैदान में उतरा है, वहीँ भाजपा ने जय आहूजा को रामगढ़ सीट से अपना उम्मीदवार चुना है, जो पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा के भतीजे हैं। जय आहूजा पहली बार विधानसभा चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं। भाजपा गहलोत सरकार के भ्रष्टाचार और लगातार बढ़ते अपराधों के मुद्दों को लेकर ज़ोर-शोर से प्रचार अभियान में जुटी रही, और उसे पूरी उम्मीद है कि इस बार उन्हें कामयाबी ज़रूर हासिल होगी। 
रामगढ़ विधानसभा सीट राजस्थान के अलवर जिले की एक सीट है।  ये अलवर लोकसभा सीट का हिस्सा है, जो ढूंढाड़ इलाके में पड़ता है। रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में 1951 से 1985 तक कांग्रेस के पास रहा, वहीं, पिछले 35 सालों से यह सीट कभी बीजेपी तो कभी कांग्रेस के खाते में जाती नजर आई है। इस सीट से सबसे ज्यादा जीत का रिकॉर्ड कांग्रेस के जुबेर खान और बीजेपी के ज्ञान देव आहूजा के नाम है। दोनों नेताओं ने इस सीट से तीन-तीन बार जीत हासिल कर चुके है। 1990 में जुबेर खान पहली बार जीते थे। इसके बाद वह 1993 और 2003 में भी विधायक चुने गए। जबकि, ज्ञान देव आहूजा 1998 में पहली बार इस सीट से जीतने में कामयाब रहे। इसके बाद ज्ञान देव आहूजा 2008 से 2018 तक लगातार 10 साल तक यहां से विधायक रहे।
रामगढ़ में क्या है जातीय समीकरण
रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी जहां कट्टर हिंदूवादी चेहरे को चुनाव मैदान में उतारती नजर आई है। वहीं, कांग्रेस पिछले 35 सालों से मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारती रही है। इस चुनाव में इस सीट पर करीब 4.50 लाख वोटर हैं, जबकि मेव मुसलमानों की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके बाद यहां दलित मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है। इसके अलावा यहां पुरुषार्थी समाज और राजपूत, जाट, ब्राह्मण, वैश्य, प्रजापत और गुर्जर मतदाताओं का भी प्रभाव है।



Posted By:ADMIN






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